सीधा जवाब: मुल्तानी मिट्टी खाने से कोई फायदा नहीं होता — नुकसान होता है। दुकान की मुल्तानी मिट्टी कॉस्मेटिक-ग्रेड होती है: खाने पर कब्ज़ या आंतों में रुकावट, भारी धातुओं का असर और आयरन की कमी हो सकती है। मिट्टी खाने की तलब खुद आयरन की कमी का संकेत है। इसका असली इस्तेमाल त्वचा पर है — 15 मिनट का फेस पैक।
मुल्तानी मिट्टी फेस उबटन पाउडर देखें →📖 6 मिनट में पढ़ें
मुल्तानी मिट्टी खाने से क्या होता है — सीधा जवाब
बहुत से लोग यह सवाल इसलिए पूछते हैं क्योंकि घर में किसी ने बताया कि मुल्तानी मिट्टी ‘पेट ठंडा’ रखती है, या क्योंकि उन्हें खुद मिट्टी खाने की तलब लगती है। सच यह है कि मुल्तानी मिट्टी खाने के लिए नहीं बनी है। बाज़ार में जो मुल्तानी मिट्टी मिलती है — पाउडर, टिकिया या फेस पैक — वह कॉस्मेटिक-ग्रेड है। उसे न तो खाने के लिए शुद्ध किया जाता है, न उसकी जांच खाने की चीज़ की तरह होती है।
शरीर में जाकर यह मिट्टी पचती नहीं है। यह आंत में जमा होती है, पानी सोखती है और भोजन के पोषक तत्वों — खासकर आयरन — को अपने साथ बांध लेती है। नतीजा: कब्ज़, पेट में भारीपन, और धीरे-धीरे खून की कमी। कुछ मामलों में आंतों में रुकावट तक हो जाती है, जिसके लिए अस्पताल जाना पड़ता है।
एक लाइन में: मुल्तानी मिट्टी लगाने की चीज़ है, खाने की नहीं। खाने से फायदा शून्य, नुकसान असली।
लोग मिट्टी क्यों खाते हैं? (पिका और आयरन की कमी)

मिट्टी, चॉक, कच्चे चावल या बर्फ खाने की तलब का एक नाम है — पिका (Pica)। यह कोई ‘आदत’ या ‘शौक’ नहीं, शरीर का संकेत है। इसकी सबसे आम वजह है आयरन की कमी (एनीमिया)। यही कारण है कि यह तलब गर्भावस्था में, किशोरियों में और लंबे समय से कम खाने वाले लोगों में ज़्यादा दिखती है।
दिक्कत यह है कि मिट्टी खाने से आयरन की कमी और बढ़ती है — क्योंकि मिट्टी आंत में आयरन को बांधकर शरीर में लगने नहीं देती। यानी जिस कमी से तलब पैदा हुई, मिट्टी उसी कमी को और गहरा करती है। यह एक दुष्चक्र है, और इसे तोड़ने का एक ही रास्ता है: खून की जांच और आयरन की कमी का इलाज डॉक्टर की सलाह से।
घर पर पहचानें: अगर मिट्टी खाने की तलब के साथ थकान, सांस फूलना, नाखूनों का टूटना या चेहरे का पीलापन भी है, तो यह आयरन की कमी की ओर इशारा है। हीमोग्लोबिन और फेरिटिन की जांच कराएं।
मुल्तानी मिट्टी खाने के नुकसान
एक-एक करके समझिए कि खाई हुई मुल्तानी मिट्टी शरीर में क्या करती है:
- कब्ज़ और आंतों में रुकावट: मिट्टी आंत में पानी सोखकर सख्त गांठ बना लेती है। शुरुआत कब्ज़ से होती है; ज़्यादा मात्रा या लंबे समय तक खाने पर आंत में रुकावट का खतरा रहता है।
- सीसा और आर्सेनिक: बिना शुद्ध की गई मिट्टी में भारी धातुएं हो सकती हैं। ये शरीर में धीरे-धीरे जमा होती हैं — इसका असर तुरंत नहीं दिखता, इसलिए लोग इसे हल्के में लेते हैं।
- आयरन और दूसरे पोषक तत्वों की कमी: मिट्टी आयरन, ज़िंक और कैल्शियम को बांध लेती है। नतीजा — एनीमिया, कमज़ोरी, बालों का झड़ना।
- दांतों का घिसना: मिट्टी के महीन रेत जैसे कण दांतों की ऊपरी परत (इनेमल) को घिसते हैं, जिससे दांत ठंडा-गर्म महसूस करने लगते हैं।
- तलब का बढ़ना: जितनी मिट्टी खाएंगे, आयरन उतना कम लगेगा, और तलब उतनी ही बढ़ेगी।
सबसे ज़्यादा जोखिम: गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे। गर्भावस्था में मिट्टी खाने से मां और शिशु दोनों में आयरन की कमी और भारी धातुओं का खतरा रहता है। ऐसी तलब हो तो अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएं।
‘फायदों’ की सच्चाई

इंटरनेट पर ‘मुल्तानी मिट्टी खाने के फायदे’ के नाम पर तीन बातें बार-बार दोहराई जाती हैं। तीनों की जांच कीजिए:
- “पेट ठंडा रखती है” — मुल्तानी मिट्टी की ठंडक त्वचा पर महसूस होती है, क्योंकि वह पानी सोखकर भाप बनने देती है। पेट के अंदर ऐसा कुछ नहीं होता। वहां वह बस सख्त होकर बैठ जाती है।
- “पेट साफ करती है / डिटॉक्स करती है” — इसका कोई प्रमाण नहीं है। मिट्टी शरीर से ‘ज़हर’ नहीं निकालती; उल्टा भारी धातुएं अंदर ला सकती है।
- “कैल्शियम और मिनरल देती है” — मिट्टी में मौजूद खनिज शरीर के लिए उपलब्ध रूप में नहीं होते, और मिट्टी दूसरे खनिजों को भी सोख लेती है। कैल्शियम के लिए दूध, दही, तिल और हरी सब्ज़ियां हैं।
यानी जिन ‘फायदों’ की बात होती है, वे या तो त्वचा के फायदे हैं जिन्हें पेट पर चिपका दिया गया, या फिर सिर्फ मान्यताएं।
व्रत में मुल्तानी मिट्टी खाना
नवरात्रि या लंबे व्रत में कुछ लोग मुल्तानी मिट्टी इसलिए खाते हैं कि ‘पेट भरा लगे’ या ‘शरीर ठंडा रहे’। यह सबसे खराब समय है मिट्टी खाने का। व्रत में शरीर पहले ही कम पोषण पर चल रहा है; ऐसे में मिट्टी बचे-खुचे पोषण को भी शरीर में लगने नहीं देती और कब्ज़ बढ़ाती है।
व्रत में भूख या कमज़ोरी लगे तो अनुमति वाली चीज़ें लें — फल, दूध, दही, साबूदाना, मखाना, सूखे मेवे, नारियल पानी। ये पेट भी भरते हैं और पोषण भी देते हैं।
असली फायदा — त्वचा के लिए
अब वह बात जिसके लिए मुल्तानी मिट्टी सचमुच जानी जाती है। आयुर्वेद में लेप की एक पुरानी परंपरा है — अष्टांग हृदय और सुश्रुत संहिता में चेहरे पर लेप (मुखलेप) लगाने की विधियां मिलती हैं, और शारंगधर संहिता में मुल्तानी मिट्टी (मुक्तिका मृद्) का उल्लेख है। त्वचा पर मुल्तानी मिट्टी तीन काम करती है:
- अतिरिक्त तेल सोखती है — तैलीय त्वचा और गर्मी के मौसम में सबसे उपयोगी।
- रोमछिद्रों की गहराई से सफाई — धूल, पसीना और जमा हुआ तेल पैक के साथ बाहर आता है।
- ठंडक — पानी सोखने और भाप बनने की वही प्रक्रिया, जो पेट में बेकार है, त्वचा पर राहत देती है।
सही तरीका (पाउडर फेस पैक): एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी फेस उबटन पाउडर को गुलाब जल या पानी में मिलाकर पेस्ट बनाएं। साफ चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट रखें। पूरी तरह सूखने से पहले — जब पैक हल्का नम हो — ठंडे पानी से हल्के हाथों से छुड़ाकर धो लें। इसके बाद क्या लगाएं, यह मुल्तानी मिट्टी लगाने के बाद क्या करें में पढ़ें।
तैलीय त्वचा के लिए हफ्ते में 2–3 बार, रूखी त्वचा के लिए हफ्ते में एक बार काफी है। रोज़ पैक लगाने से त्वचा रूखी हो जाती है।
मुल्तानी मिट्टी फेस उबटन पाउडर →डॉक्टर से कब मिलें
- मिट्टी खाने की तलब कई हफ्तों से बनी हुई है।
- गर्भावस्था में मिट्टी या चॉक खाने का मन करता है।
- बच्चा बार-बार मिट्टी खाता है।
- मिट्टी खाने के बाद पेट में तेज़ दर्द, उल्टी या कई दिन से कब्ज़ है — यह आंत में रुकावट का संकेत हो सकता है।
यह लेख जानकारी के लिए है, किसी बीमारी के इलाज की सलाह नहीं। लक्षण हों तो योग्य डॉक्टर से मिलें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मुल्तानी मिट्टी खाने से क्या होता है? +
दुकान में मिलने वाली मुल्तानी मिट्टी कॉस्मेटिक-ग्रेड होती है, खाने के लिए नहीं। इसे खाने से कब्ज़ या आंतों में रुकावट, सीसा-आर्सेनिक जैसी भारी धातुओं का असर, भोजन के आयरन का शरीर में न लगना (एनीमिया का बढ़ना) और दांतों का घिसना हो सकता है। मिट्टी खाने की तलब (पिका) अक्सर आयरन की कमी का संकेत है — मिट्टी नहीं, खून की जांच कराएं।
क्या मुल्तानी मिट्टी खाने के कोई फायदे हैं? +
नहीं। मुल्तानी मिट्टी खाने का कोई प्रमाणित फायदा नहीं है। ‘पेट ठंडा रखती है’ या ‘पेट साफ करती है’ जैसी बातें लोक-मान्यताएं हैं, इनके पीछे कोई प्रमाण नहीं है, जबकि नुकसान असली हैं। इसके असली फायदे त्वचा पर हैं — तेल सोखना, गहराई से सफाई और ठंडक।
मुल्तानी मिट्टी खाने के नुकसान क्या हैं? +
मुख्य नुकसान: कब्ज़ और आंतों में रुकावट; बिना शुद्ध की गई मिट्टी से सीसा या आर्सेनिक का असर; मिट्टी आंत में आयरन को बांध लेती है, जिससे खून की कमी बढ़ती है; रेत जैसे कणों से दांतों की परत घिसना; और समय के साथ मिट्टी खाने की तलब और बढ़ना। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए जोखिम सबसे ज़्यादा है।
क्या व्रत (नवरात्रि) में मुल्तानी मिट्टी खा सकते हैं? +
नहीं। व्रत में शरीर पहले ही कम पोषण पर चल रहा होता है, ऐसे में मिट्टी खाना और ज़्यादा नुकसानदेह है — यह बचे-खुचे पोषण को भी शरीर में लगने नहीं देती। व्रत में फल, दूध, साबूदाना, मखाना या मेवे जैसी अनुमति वाली चीज़ें खाएं।
मिट्टी खाने की तलब क्यों लगती है? +
मिट्टी, चॉक या कच्चे चावल खाने की तलब को ‘पिका’ कहते हैं। इसकी सबसे आम वजह आयरन की कमी (एनीमिया) है, और यह गर्भावस्था में भी देखी जाती है। खून की जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह से आयरन की कमी पूरी करें — कमी दूर होते ही तलब आमतौर पर चली जाती है।