सारांश: मुल्तानी मिट्टी, जिसे इंग्लिश में फ़ुलर्स अर्थ (Fuller's Earth) कहते हैं, एक खनिज मिट्टी है जो अपने भार का लगभग दो से ढाई गुना तेल सोख लेती है। यह स्थिर खनिज है, खाने की चीज़ नहीं — इसलिए शुद्ध मिट्टी रासायनिक रूप से एक्सपायर नहीं होती; नमी, फफूँद या बाहर से सोखी गंध ही इसे इस्तेमाल के लायक़ नहीं छोड़ती।
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Read this article in English: The Ultimate Guide to Multani Mitti (Fuller's Earth): Benefits, Uses, Expiry, and Recipes
- मुल्तानी मिट्टी से नहाने के फायदे और यह मिट्टी क्या है
- क्या मुल्तानी मिट्टी एक्सपायर होती है
- मुल्तानी मिट्टी काम कैसे करती है
- चेहरे और त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी के फायदे
- हर तरह की त्वचा के लिए फेस पैक
- शरीर और बालों के लिए इस्तेमाल
- रोज़ का वॉश और हफ़्ते का मास्क
- मुल्तानी मिट्टी क्या नहीं कर सकती
- असली और नकली मिट्टी की पहचान
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

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मुल्तानी मिट्टी कॉम्बो में रोज़ इस्तेमाल होने वाला उबटन वॉश और दो साबुन साथ आते हैं, इसलिए चेहरे और शरीर की रोज़ की सफ़ाई एक ही जगह से पूरी हो जाती है।
प्रोडक्ट देखें →मुल्तानी मिट्टी से नहाने के फायदे और यह मिट्टी क्या है
हिंदी, उर्दू और भारत की ज़्यादातर भाषाओं में हम इसे मुल्तानी मिट्टी कहते हैं। इंग्लिश में इसका नाम फ़ुलर्स अर्थ (Fuller's Earth) है, क्योंकि यूरोप में कच्चे ऊन की चिकनाई साफ़ करने की प्रक्रिया “fulling” में यही मिट्टी सदियों तक इस्तेमाल होती रही। आयुर्वेद में इसे मुक्तिका मृद यानी मोती जैसी मिट्टी कहा गया है।
नाम मुल्तान शहर (आज के पाकिस्तान में) से आया है, जहाँ यह पहली बार व्यापारिक स्तर पर निकाली गई। भारत में अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात से आती है। रासायनिक भाषा में यह जलयुक्त एल्युमिनियम सिलिकेट है, जिसके खनिज इस तरह काम आते हैं:
- सिलिका — कोलेजन बनने में सहारा, त्वचा कसी हुई दिखती है।
- मैग्नीशियम ऑक्साइड — त्वचा शांत महसूस होती है, लालिमा कम दिखती है।
- कैल्शियम ऑक्साइड — कोशिकाओं के नवीनीकरण को सहारा।
- आयरन ऑक्साइड — मटमैला लाल-स्लेटी रंग इसी से।
- एल्युमिनियम ऑक्साइड — प्राकृतिक कसाव, रोमछिद्र छोटे दिखते हैं।
आयुर्वेद में इसे ठंडी तासीर वाली (शीत) और सुखाने वाली (रूक्ष) माना गया है तथा पित्त और कफ को शांत करने वाला बताया जाता है। इसीलिए इसे तैलीय, मिश्रित और जल्दी दाने निकलने वाली त्वचा के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है; रूखी (वात) त्वचा पर इसे शहद, दूध, घी या गुलाब जल के साथ ही लगाएँ।
शार्ङ्गधर संहिता में मिट्टी (मृद) को त्वचा (त्वक्) के लिए शोधन यानी शुद्ध करने वाला कहा गया है — नहाने से पहले उबटन लगाने की परंपरा इसी सोच से जुड़ी मानी जाती है। मुल्तानी मिट्टी से नहाने के फायदे भी यही माने जाते हैं: शरीर से अतिरिक्त तेल, पसीना और धूल हट जाती है और त्वचा हल्की तथा साफ़ महसूस होती है।
क्या मुल्तानी मिट्टी एक्सपायर होती है

संक्षेप में: सही तरीक़े से रखी गई शुद्ध मुल्तानी मिट्टी रासायनिक रूप से एक्सपायर नहीं होती। लेकिन नमी, सूक्ष्म जीवों का संदूषण या बाहर से सोखी गंध इसे इस्तेमाल के लायक़ नहीं छोड़ती।
यह तलछटी खनिज है, जिसे बनने में लाखों साल लगे। इसके एल्युमिनियम सिलिकेट और धातु-ऑक्साइड यौगिक सामान्य परिस्थितियों में स्थिर रहते हैं, जबकि तेल और पौधों के सत्व समय के साथ बासी हो जाते हैं। काओलिन और बेंटोनाइट जैसी मिलती-जुलती मिट्टियों के बारे में औषधि-संहिताओं (फार्माकोपिया) में लिखा है कि सूखी रखी जाएँ तो इनकी उपयोग-अवधि की कोई तय सीमा नहीं होती।
फिर भी चार स्थितियों में यह इस्तेमाल के लायक़ नहीं रहती:
- नमी — नमी सोखते ही चूर्ण गुठलियों में बदल जाता है और उस पर फफूँद आ सकती है, जिसे त्वचा पर लगाना सुरक्षित नहीं माना जाता।
- सूक्ष्म जीवों का संदूषण — डिब्बे में बार-बार गीले हाथ या पानी की बूँदें जाएँ तो ऊपरी परत पर सूक्ष्म जीव पनप सकते हैं।
- गंध सोख लेना — साबुन, इत्र या मसालों के पास रखी मिट्टी उन्हीं जैसी महकने लगती है, और तब उसे दूषित माना जाएगा।
- मिलाई गई सामग्री — जड़ी-बूटियाँ, गुलाब जल या दूध का चूर्ण मिलते ही उपयोग-अवधि (शेल्फ लाइफ़) सबसे जल्दी ख़राब होने वाली सामग्री से तय होती है, आम तौर पर 12 से 24 महीने। इसीलिए मिली-जुली तैयारियों पर एक्सपायरी डेट छपी होती है।
रख-रखाव आसान है। मिट्टी को हवा बंद डिब्बे में, सूखी और अँधेरी जगह पर रखें; बाथरूम में रखना ठीक नहीं माना जाता, क्योंकि वहाँ भाप और गर्मी दोनों होती हैं। डिब्बे में कभी गीला चम्मच या हाथ न डालें।
इन संकेतों पर इस्तेमाल न करें: सफ़ेद, हरे या काले धब्बों जैसी फफूँद; बासी या खट्टी गंध (ताज़ी मिट्टी में सिर्फ़ हल्की मिट्टी जैसी महक होती है); सख़्त गुठलियाँ जो पानी में घुलें ही नहीं; और बाहर से सोखी हुई तेज़ गंध।
अगर सादी मिट्टी का पैकेट साल भर से पड़ा है और देखने, सूँघने तथा छूने में ताज़ा लगता है, तो उसे इस्तेमाल किया जा सकता है।
मुल्तानी मिट्टी काम कैसे करती है
इसकी सोखने की क्षमता अपने भार का लगभग दो से ढाई गुना मानी जाती है — यानी 10 ग्राम मिट्टी 20 से 25 ग्राम तक तेल और अशुद्धियाँ अपनी सतह पर बाँध सकती है। वजह इसकी परतदार संरचना है: सिलिकेट खनिजों की परतों के बीच सूक्ष्म जगहें बनती हैं, जिनमें तेल के कण बँध जाते हैं और धोते समय मिट्टी के साथ ही बह जाते हैं।
यही बात इसे केमिकल वाले फेस वॉश से अलग करती है। SLS वाला साबुन तेल को बिना किसी भेद के घोल देता है — मैल भी और त्वचा की सुरक्षा परत बनाने वाला सीबम भी। मुल्तानी मिट्टी का असर इससे अलग माना जाता है: यह ज़रूरत से ज़्यादा तेल सोखती है, जबकि सुरक्षा परत (एसिड मैंटल) बनी रहती है।
pH भी इसी से जुड़ा है। मिट्टी का pH 7.0–7.5 यानी लगभग न्यूट्रल है और स्वस्थ त्वचा का 5.5–6.5, जबकि बाज़ार के केमिकल फेस वॉश का 9–10 यानी क्षारीय — ऐसे प्रोडक्ट रोज़ इस्तेमाल करने से त्वचा की सुरक्षा परत कमज़ोर पड़ सकती है। साथ ही यह मिट्टी ऊपर बताए गए खनिजों की थोड़ी मात्रा त्वचा पर छोड़ जाती है।
चेहरे और त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी के फायदे
- रोमछिद्रों की गहरी सफ़ाई — महीन कण रोमछिद्रों में जमा सीबम, मृत कोशिकाओं और धूल से बँध जाते हैं, जिससे ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स कम दिख सकते हैं।
- तेल का संतुलन — तेज़ फेस वॉश ऊपर का सारा तेल हटा देते हैं और भरपाई में त्वचा और तेल बनाने लगती है; मिट्टी सिर्फ़ अतिरिक्त तेल सोखती है।
- उसी दिन दिखने वाला निखार — हल्की मालिश से ऊपरी मृत कोशिकाएँ उतरती हैं, जिससे त्वचा उसी दिन साफ़ लग सकती है; शादी से पहले उबटन लगाने की परंपरा इसी असर से जुड़ी मानी जाती है।
- जिस त्वचा पर मुँहासे जल्दी निकलते हैं, उसके लिए सहारा — तेल सोखना और रोमछिद्रों का खुलना, दोनों मिलकर इसे तैलीय त्वचा के लिए पारंपरिक पसंद बनाते हैं; कई तेज़ केमिकल की तुलना में यह सौम्य मानी जाती है।
- टैन और असमान रंगत — ऊपरी परत की टैन हुई कोशिकाएँ हटती हैं और नीचे की ताज़ा त्वचा सामने आती है; हल्दी और बेसन के साथ यही पारंपरिक उबटन है।
- रोमछिद्रों में कसाव — एल्युमिनियम सिलिकेट का कसाव देने वाला गुण रोमछिद्रों को छोटा दिखाने में मदद करता है, और गुलाब जल से टोनिंग के बाद यह असर और साफ़ लगता है।
- उम्र के निशानों पर सहारा — सिलिका कोलेजन बनने में सहारा देती है और कसाव से महीन रेखाएँ कम दिखाई देती हैं।
यह त्वचा के प्रकार पर निर्भर करता है, लिंग पर नहीं — इसलिए मुल्तानी मिट्टी के फायदे पुरुषों के लिए भी अलग नहीं हैं।
हर तरह की त्वचा के लिए फेस पैक
तैलीय त्वचा के लिए। 2 बड़े चम्मच मिट्टी, नीम का पानी और नींबू के रस की 3–4 बूँदें, 15 मिनट — नींबू के साथ यह मेल तैलीय त्वचा के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। कसाव के लिए 2 बड़े चम्मच मिट्टी, 1 अंडे का सफ़ेद भाग और गुलाब जल, 15 मिनट। दाने निकलने वाली त्वचा के लिए 2 बड़े चम्मच मिट्टी, 1 छोटा चम्मच नीम चूर्ण, 1 छोटा चम्मच हल्दी और पानी, 20 मिनट; मुल्तानी मिट्टी और हल्दी का यह मेल भारतीय घरों में लंबे समय से इस्तेमाल होता आया है।
रूखी (वात) त्वचा के लिए। 2 बड़े चम्मच मिट्टी, 1 बड़ा चम्मच शहद और कच्चा दूध, सिर्फ़ 12 मिनट। संवेदनशील त्वचा के लिए 2 बड़े चम्मच मिट्टी, 2 बड़े चम्मच ताज़ा एलोवेरा जेल और गुलाब जल, 12 मिनट।
निखार और शादी की तैयारी के लिए। 2 बड़े चम्मच मिट्टी, 1 बड़ा चम्मच गुलाब जल, चुटकी भर हल्दी और चुटकी भर केसर, 15 मिनट। पपीते वाला पैक: 2 बड़े चम्मच मिट्टी, 2 बड़े चम्मच मसला पपीता और 1 छोटा चम्मच शहद, 15 मिनट; पपीते का पपेन ऊपरी मृत कोशिकाएँ हटाने में सहायक माना जाता है।
हर पैक पर लागू नियम: पैक हमेशा नम और साफ़ त्वचा पर लगाएँ और उसे पूरी तरह सूखकर चटकने न दें — इसका मतलब है कि उसने त्वचा से ज़रूरत से ज़्यादा नमी खींच ली। हल्का नम रहते हुए पानी छिड़ककर, गोल-गोल मालिश करते हुए हटाएँ, फिर गुलाब जल से टोनिंग करें और रात में नमी देने वाला हल्का तेल लगाएँ।
मौसम के साथ इस्तेमाल भी बदलता है: गर्मी (ग्रीष्म) में हफ़्ते में 3–4 बार गुलाब जल या खीरे के रस के साथ, बारिश (वर्षा) में 3–4 बार नीम के पानी या हल्दी के साथ, शरद में 2–3 बार शहद और दही के साथ, और सर्दी (हेमंत) में 1–2 बार दूध, बादाम तेल या घी के साथ।
शरीर और बालों के लिए इस्तेमाल
पूरे शरीर का उबटन। मिट्टी को बेसन, हल्दी और कच्चे दूध के साथ मिलाकर नहाने से करीब 10 मिनट पहले लगाएँ। इससे शरीर की टैन उतरती है, खुरदुरी त्वचा चिकनी लगती है और रंगत एक जैसी दिखती है।
पीठ, कोहनी, घुटने और पैर। पीठ पर मिट्टी और नीम के पानी का पेस्ट 15 मिनट रखा जाता है; वहाँ हाथ मुश्किल से पहुँचता है, इसलिए तेल सोखने वाला यह पेस्ट वहाँ की त्वचा को साफ़ दिखाने में मदद कर सकता है। कोहनी और घुटनों पर मिट्टी में नींबू का रस और नारियल तेल मिलाकर नहाते समय हल्के हाथ से रगड़ें। पैरों के लिए गुनगुने पानी में मिट्टी घोलकर 15 मिनट भिगोएँ, फिर झाँवे से रगड़ें।
सिर की त्वचा और बाल। 3 बड़े चम्मच मिट्टी को दही के साथ पेस्ट बनाकर सिर की त्वचा पर लगाएँ, 20 मिनट रखें और धो लें — अतिरिक्त तेल, बालों में लगाई चीज़ों का जमाव और दिखने वाली पपड़ी हट जाती है। बालों को घना दिखाने के लिए इसे मेथी के पानी और तेल की कुछ बूँदों के साथ मिलाकर 20 मिनट लगाया जाता है।
रोज़ का वॉश और हफ़्ते का मास्क

आयुर्वेद हब के इन दो मुल्तानी मिट्टी प्रोडक्ट को लेकर अक्सर उलझन होती है, जबकि दोनों अलग-अलग कामों के लिए बने हैं और एक-दूसरे की जगह नहीं लेते।
मुल्तानी मिट्टी उबटन — रोज़ का वॉश। क्रीम के रूप में 15 सामग्रियों वाला वॉश: मुल्तानी मिट्टी, मसूर दाल, गुलाब सत्व और गुलाब जल, हल्दी, एलोवेरा, कोल्ड-प्रेस्ड नारियल तेल, नीम तेल, अरंडी का तेल, गुलाब की पंखुड़ी का चूर्ण, चावल और जौ का आटा, कपूर, पुदीना तथा अजवाइन सत्व। इसे 2 मिनट के अंदर झाग बनाकर धो लेना होता है, मास्क की तरह छोड़ना नहीं — चेहरे और शरीर, दोनों की रोज़ की सफ़ाई इसी से होती है।
फेस उबटन — हफ़्ते का मास्क। 11 सामग्रियों वाला चूर्ण: मुल्तानी मिट्टी, गाय के दूध का चूर्ण (गो दुग्ध चूर्ण, जिसे चरक संहिता में वर्ण्य यानी रंगत निखारने वाला कहा गया है), गुलाब चूर्ण, मसूर दाल का आटा, चावल का आटा, गुलाब सत्व, गुलाब जल, नीम एंज़ाइम, एलोवेरा एंज़ाइम, एलोवेरा चूर्ण और गाय का घी। इसे गुलाब जल या दूध के साथ पेस्ट बनाकर लगाएँ, 15 मिनट रखें और हल्के हाथ से रगड़कर हटाएँ — हफ़्ते में 2 से 3 बार।
जिन्हें यही सफ़ाई साबुन के आसान रूप में चाहिए, उनके लिए दिव्य स्नान भी है — मुल्तानी मिट्टी, मसूर दाल, हल्दी, मुलेठी और शिया बटर जैसी 16 सामग्रियों से हाथ से बना साबुन। मुल्तानी मिट्टी कॉम्बो में उबटन वॉश और दो साबुन एक साथ मिल जाते हैं।
मुल्तानी मिट्टी क्या नहीं कर सकती

जितना ज़रूरी यह जानना है कि यह मिट्टी क्या करती है, उतना ही यह भी कि वह क्या नहीं करती। नीचे लिखी बातें सही नहीं हैं और हम इनका दावा नहीं करते।
- यह आपकी प्राकृतिक रंगत नहीं बदलती। यह रंग गोरा करने वाला प्रोडक्ट नहीं है। मृत कोशिकाएँ हटने से आने वाला निखार असली है, लेकिन साबुन या फेस पैक से त्वचा का मेलेनिन बदल जाए, यह जैविक रूप से संभव नहीं।
- गहरे, गड्ढेदार निशान इससे नहीं जाते। सतही निशान और हाल के धब्बे हल्के दिख सकते हैं, पर गहरे निशानों के लिए आम तौर पर माइक्रोनीडलिंग या लेज़र जैसी प्रक्रियाएँ सुझाई जाती हैं।
- गंभीर, गाँठदार मुँहासों में यह मुख्य समाधान नहीं है। ऐसी स्थिति में इसे सहायक देखभाल की तरह देखें और त्वचा विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) से मिलें।
- यह खाने की चीज़ नहीं है। खाने योग्य मिट्टियाँ अलग होती हैं और खाद्य-स्तर की परिस्थितियों में बनती हैं।
- सक्रिय एक्ज़िमा या खुले घाव पर इसका इस्तेमाल सुरक्षित नहीं है। त्वचा के सामान्य होने तक रुकें।
अगर त्वचा से जुड़ी कोई स्थिति लंबे समय से चल रही है, आप गर्भवती हैं, बच्चों पर इस्तेमाल करना चाहती हैं या कोई दवा चल रही है, तो शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या वैद्य से सलाह ज़रूर लें।
असली और नकली मिट्टी की पहचान
सस्ती मुल्तानी मिट्टी में अक्सर टैल्क, सफ़ेद चाइना क्ले या चॉक मिला दी जाती है। पाँच आसान तरीक़ों से इसे परखा जा सकता है।
- रंग — असली मिट्टी स्लेटी-हरी या हल्की पीली-भूरी होती है। चमकदार सफ़ेद चूर्ण टैल्क या चॉक का संकेत देता है, और भड़कीला नारंगी-लाल रंग बताता है कि उसमें रंग मिलाया गया है।
- गंध — हल्की, मिट्टी जैसी। तेज़ ख़ुशबू बनावटी सुगंध मिलाए जाने का संकेत है।
- बनावट — महीन, कंकड़ रहित, पानी में आसानी से घुलने वाली। किरकिरापन मिलावट का संकेत है।
- पानी वाली जाँच — 1 छोटा चम्मच मिट्टी 4 छोटे चम्मच पानी में मिलाएँ। असली मिट्टी एक मिनट से कम में चिकना पेस्ट बना लेती है; मिलावटी मिश्रण देर से बँधता है।
- सामग्री सूची — शुद्ध प्रोडक्ट में मुल्तानी मिट्टी पहले नंबर पर होनी चाहिए। पाँचवें नंबर या उससे नीचे होने का मतलब है कि मिट्टी की मात्रा बहुत कम है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मुल्तानी मिट्टी से नहाने के फायदे क्या हैं? +
यह मिट्टी शरीर से अतिरिक्त तेल, पसीना और धूल सोख लेती है और ऊपरी मृत कोशिकाएँ उतारती है, जिससे त्वचा साफ़ और एक जैसी दिखने लगती है। इसे बेसन, हल्दी और कच्चे दूध के साथ मिलाकर नहाने से करीब 10 मिनट पहले लगाया जाता है; रूखी त्वचा हो तो पानी की जगह दूध या गुलाब जल लें।
मुल्तानी मिट्टी को इंग्लिश में क्या कहते हैं (multani mitti ko kya kahate hain)? +
इंग्लिश में इसे फ़ुलर्स अर्थ (Fuller's Earth) कहते हैं — दोनों नाम एक ही खनिज मिट्टी के हैं। यह नाम यूरोप में कच्चे ऊन की सफ़ाई, यानी “fulling” की पुरानी प्रक्रिया से आया है; संस्कृत में इसका नाम मुक्तिका मृद है।
क्या मुल्तानी मिट्टी एक्सपायर होती है और क्या इसकी एक्सपायरी डेट होती है (multani mitti expire hoti hai ya nahin)? +
शुद्ध मुल्तानी मिट्टी स्थिर खनिज है, इसलिए रासायनिक रूप से एक्सपायर नहीं होती; सूखी, बंद और तेज़ गंध से दूर रखी जाए तो सालों चलती है। छपी तारीख़ मिली-जुली तैयारियों पर लागू होती है — जड़ी-बूटियाँ, तेल या गुलाब जल मिलते ही उपयोग-अवधि सबसे जल्दी ख़राब होने वाली सामग्री से तय होती है, आम तौर पर 12 से 24 महीने।
क्या एक्सपायरी डेट के बाद मुल्तानी मिट्टी इस्तेमाल कर सकते हैं (can we use multani mitti after expiry date)? +
मिली-जुली तैयारियों पर छपी तारीख़ का पालन करें, क्योंकि उनमें वनस्पति सामग्री होती है। सादे चूर्ण में तारीख़ से ज़्यादा उसकी हालत देखिए: बासी गंध, धब्बे या नमी से बनी सख़्त गुठलियाँ दिखें तो उसे फेंक दें।
क्या मुल्तानी मिट्टी रोज़ लगा सकते हैं और क्या यह रूखी त्वचा के लिए सही है? +
क्रीम के रूप में मिलने वाला उबटन वॉश रोज़ के लिए बना है और 2 मिनट में धो दिया जाता है, जबकि चूर्ण वाला मास्क हफ़्ते में 2–3 बार, 15 मिनट के लिए लगाया जाता है। सादा चूर्ण हफ़्ते में 2–4 बार काफ़ी है — रोज़ लगाना ज़्यादातर लोगों के लिए बहुत सुखाने वाला हो सकता है। रूखी त्वचा पर इसे दूध, शहद, घी या गुलाब जल के साथ मिलाएँ और 10–12 मिनट में हटा दें।
असली मुल्तानी मिट्टी को कैसे पहचानें (multani mitti ko kaise pahchane)? +
असली मिट्टी स्लेटी-हरी या हल्की पीली-भूरी होती है, महक हल्की मिट्टी जैसी और बनावट महीन तथा कंकड़ रहित। 1 छोटा चम्मच मिट्टी 4 छोटे चम्मच पानी में मिलाइए — असली मिट्टी एक मिनट से कम में चिकना पेस्ट बना लेती है। चमकदार सफ़ेद चूर्ण, तेज़ ख़ुशबू या किरकिरापन मिलावट के संकेत हैं।
क्या मुल्तानी मिट्टी खा सकते हैं — मुल्तानी मिट्टी खाने के फायदे क्या हैं? +
नहीं। त्वचा पर लगाने वाली मुल्तानी मिट्टी खाने के लिए प्रमाणित नहीं होती, इसलिए इसे खाने का कोई फायदा गिनाया नहीं जा सकता। मिट्टी खाने की आदत (जियोफ़ेजिया) को खान-पान संबंधी विकार माना जाता है, और इससे आयरन की कमी तथा आँतों में रुकावट जैसी दिक्कतें जुड़ी बताई जाती हैं।