मुल्तानी मिट्टी खनिजों से भरपूर एक प्राकृतिक मिट्टी है, जिसका इस्तेमाल भारत में दो हज़ार साल से भी ज़्यादा समय से त्वचा की देखभाल में होता आया है। आयुर्वेद में इसे शीत (ठंडी) और रूक्ष (सूखापन लाने वाली) माना गया है, इसलिए तैलीय और मिश्रित त्वचा पर इसका उपयोग सबसे आम है। रूखी त्वचा के लिए इसे शहद, दूध या गुलाब जल के साथ मिलाकर लगाने की सलाह दी जाती है।
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Read this article in English: The Benefits of Multani Mitti: A Comprehensive Guide to Natural Beauty and Wellness
- मुल्तानी मिट्टी क्या है और मुल्तानी मिट्टी कैसी होती है
- मुल्तानी मिट्टी लगाने से क्या होता है — त्वचा पर असर
- मुल्तानी मिट्टी के फायदे पुरुषों के लिए
- बालों और सिर की त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी
- मुल्तानी मिट्टी लगाने का सही तरीका
- कौन-सी त्वचा के लिए कौन-सा फेस पैक
- मुल्तानी मिट्टी से नहाने और साबुन-उबटन के फायदे
- किन बातों का ध्यान रखें
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

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मुल्तानी मिट्टी उबटन में मिट्टी, जड़ी-बूटियाँ और नमी देने वाली सामग्री पहले से मिली होती है, इसलिए रोज़ चेहरे और शरीर की सफ़ाई के लिए इसे तैयार रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रोडक्ट देखें →मुल्तानी मिट्टी क्या है और मुल्तानी मिट्टी कैसी होती है
भारतीय घरों में मुल्तानी मिट्टी कोई नई चीज़ नहीं है। दादी-नानी के समय से यह कई घरों के सौंदर्य नुस्ख़ों का हिस्सा रही है, और त्वचा की देखभाल में इसका इस्तेमाल दो हज़ार साल से भी ज़्यादा पुराना माना जाता है। इसका नाम मुल्तान शहर से आया है, जहाँ यह सबसे पहले मिली थी और जो अब पाकिस्तान में है।

अंग्रेज़ी में इसे फुलर्स अर्थ (Fuller's Earth) कहा जाता है। यह प्राकृतिक रूप से बनने वाली खनिज मिट्टी है, जो छूने में हल्की, सूखी और बारीक लगती है और पानी मिलाते ही चिकना पेस्ट बन जाती है। इसमें मुख्य रूप से ये घटक पाए जाते हैं:
- कैल्शियम बेंटोनाइट — यही वह घटक है जिसकी वजह से मुल्तानी मिट्टी तेल सोखने के लिए जानी जाती है।
- मैग्नीशियम क्लोराइड — त्वचा के लचीलेपन और एक-सी दिखने वाली रंगत से जोड़ा जाता है।
- सिलिका — त्वचा के कसाव और कोलेजन बनने की प्रक्रिया से जोड़ी जाती है।
- आयरन ऑक्साइड — इसी की वजह से मुल्तानी मिट्टी का रंग मिट्टी जैसा हल्का भूरा होता है।
- एल्युमिना — प्राकृतिक कसाव लाने वाला घटक, जिससे रोमछिद्र कसे हुए दिख सकते हैं।
तेल और अशुद्धियाँ सोखने की इसी क्षमता को मुल्तानी मिट्टी की ख़ास बात माना जाता है, और यही गुण इसे साधारण मिट्टी से अलग करता है।
आयुर्वेद की दृष्टि: आयुर्वेदीय समझ में मुल्तानी मिट्टी को शीत (ठंडी) और रूक्ष (सूखापन लाने वाली) माना गया है। इसे पित्त और कफ को शांत करने से जोड़ा जाता है, इसलिए तैलीय और मिश्रित त्वचा पर इसका इस्तेमाल सबसे आम है। वात यानी रूखी त्वचा वालों के लिए इसे शहद, दूध या गुलाब जल जैसी नमी देने वाली चीज़ों के साथ मिलाने की सलाह दी जाती है।
मुल्तानी मिट्टी लगाने से क्या होता है — त्वचा पर असर
चेहरे पर मुल्तानी मिट्टी लगाने के बाद जो असर दिखता है, वह मुख्य रूप से दो चीज़ों से आता है — अतिरिक्त तेल का सोखा जाना और सतह पर जमी मृत कोशिकाओं का हटना। परंपरा में इसके फ़ायदे इसी आधार पर गिनाए जाते हैं।

रोमछिद्रों की गहरी सफ़ाई — मुल्तानी मिट्टी के बारीक कण रोमछिद्रों के भीतर तक पहुँचते हैं और वहाँ जमा तेल, मृत कोशिकाओं, धूल और प्रदूषण के कणों से जुड़ जाते हैं। पैक हटाते समय यह सब उसके साथ बाहर निकल आता है।
तेल का संतुलन — परंपरा में माना जाता है कि यह ज़रूरत से ज़्यादा तेल सोखती है, लेकिन त्वचा की अपनी सुरक्षा वाली तेल की परत को पूरी तरह नहीं हटाती। यही वजह है कि इसके बाद चेहरा खिंचा-खिंचा और रूखा नहीं लगता, जैसा कई बार तेज़ सफ़ाई करने वाली चीज़ों के बाद महसूस होता है।
तुरंत दिखने वाला निखार — सतह पर जमी मृत कोशिकाएँ और मैल हटने से चेहरा लगाने के बाद साफ़ और चमकदार दिख सकता है। भारत में दुल्हनों की शादी से पहले की तैयारी में यह पीढ़ियों से इसी वजह से शामिल रही है।
साफ़ और संतुलित दिखने वाली त्वचा — तेल सोखने और रोमछिद्र साफ़ करने के इसी गुण के कारण साफ़ दिखने वाली त्वचा के लिए इसे लंबे समय से चुना जाता रहा है। बंद रोमछिद्र खुलते हैं और चेहरा हल्का तथा ताज़ा महसूस हो सकता है।
टैन का कम दिखना — नियमित रूप से लगाने पर यह धूप से पड़े टैन वाली ऊपरी परत को धीरे-धीरे हटाती है, जिससे नीचे की हल्की रंगत सामने आती है। यहाँ यह समझ लेना ज़रूरी है कि मुल्तानी मिट्टी त्वचा को गोरा नहीं करती — मृत कोशिकाएँ हटने से रंगत बस एक जैसी और साफ़ दिखने लगती है।
रोमछिद्र और बारीक लकीरें — इसके प्राकृतिक कसाव लाने वाले गुण से बड़े दिखने वाले रोमछिद्र नियमित उपयोग में कसे हुए दिखने लगते हैं। सतह कसी दिखने पर बारीक लकीरें भी पहले से कम नज़र आ सकती हैं।
मुल्तानी मिट्टी के फायदे पुरुषों के लिए
मुल्तानी मिट्टी पुरुषों की त्वचा पर भी उसी तरह काम करती है और इसके लिए कोई अलग तरीका अपनाने की ज़रूरत नहीं होती।
तैलीय त्वचा और चिपचिपापन — जिन पुरुषों की त्वचा तैलीय है, उनके लिए मुल्तानी मिट्टी के पैक को ख़ास तौर पर उपयोगी माना जाता है, क्योंकि यह अतिरिक्त तेल सोखती है और रोमछिद्रों को साफ़ रखती है। दिनभर बाहर रहने के बाद चेहरे पर जो मैल और तेल जमता है, उसे हटाने में यह मदद कर सकती है।
दाढ़ी बनाने के बाद की जलन — दाढ़ी बनाने के बाद होने वाली जलन में मुल्तानी मिट्टी को आराम देने वाला माना जाता है। इसका शीत यानी ठंडा स्वभाव ही वह वजह है, जिसके चलते दाढ़ी बनाने के बाद इसे आरामदेह माना जाता है।
रोमछिद्रों का कसाव — चेहरे के बड़े दिखने वाले रोमछिद्र नियमित उपयोग से कसे हुए दिख सकते हैं और त्वचा साफ़ बनी रहती है। तरीका वही है जो आगे बताया गया है। जिनके पास हर बार पैक बनाने का समय नहीं है, वे उबटन या साबुन के रूप में इसे रोज़ की सफ़ाई में शामिल कर सकते हैं।
बालों और सिर की त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी
मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल सिर्फ़ चेहरे तक सीमित नहीं है। सिर की त्वचा पर तेल और बालों में लगाई जाने वाली चीज़ों का ज़्यादा जमाव रूसी, बाल गिरने और बालों के चिपके तथा बेजान दिखने की आम वजहों में गिना जाता है। इसी समझ के साथ बालों की देखभाल में भी इसका उपयोग होता आया है।
सिर की त्वचा की सफ़ाई — सिर की त्वचा पर लगाने से मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त तेल और जमी हुई परत को सोख लेती है, जिससे बालों की जड़ों को खुली जगह मिलती है। परंपरा में इसे सिर की त्वचा को फिर से संतुलित करने का सौम्य तरीका माना जाता है।
घर पर बनने वाला हेयर मास्क — मुल्तानी मिट्टी में दही और मेथी का चूर्ण मिलाकर एक गाढ़ा मास्क तैयार किया जा सकता है। दही और मेथी के कारण इसे प्रोटीन से भरपूर माना जाता है, और इसका उपयोग बालों को मज़बूती तथा घनापन देने के लिए किया जाता है। इसे जड़ों से लेकर सिरों तक लगाएँ, बीस मिनट रहने दें और फिर किसी सौम्य उबटन या शैम्पू से धो लें।
रूसी और पपड़ी — सिर की त्वचा से अतिरिक्त तेल और सूखी पपड़ी हटने पर वह साफ़ और संतुलित रहती है — तैलीय और पपड़ीदार सिर की त्वचा को सँभालने के लिए आयुर्वेद में यही पारंपरिक तरीका अपनाया जाता रहा है। इसके लिए मुल्तानी मिट्टी को नीम के पानी में घोलकर लगाने की सलाह दी जाती है।
मुल्तानी मिट्टी लगाने का सही तरीका
मुल्तानी मिट्टी का असर काफ़ी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि इसे लगाया कैसे जा रहा है। कुछ आसान बातें ध्यान में रखने से इसका इस्तेमाल ज़्यादा आरामदेह हो जाता है।

नम त्वचा पर लगाएँ — चेहरा साफ़ करके हल्का गीला कर लें, फिर पैक लगाएँ। इससे पैक एक बराबर फैलता है और त्वचा ज़रूरत से ज़्यादा नहीं सूखती।
पूरी तरह सूखने न दें — पैक को तब हटाएँ जब वह हल्का नम हो। सूखकर चटकने लगी मिट्टी त्वचा को खींचती है और जलन की वजह बन सकती है। हटाने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।
बाद में गुलाब जल — पैक हटाने के बाद गुलाब जल लगाने की सलाह दी जाती है, ताकि त्वचा का पीएच संतुलन बना रहे और चेहरा ताज़ा महसूस हो।
नमी लौटाना ज़रूरी है — इसके बाद कुमकुमादि तैलम या नारियल तेल की कुछ बूँदें लगाकर नमी को त्वचा में बनाए रखा जाता है। रूखी त्वचा वालों के लिए यह क़दम छोड़ना ठीक नहीं माना जाता।
कितनी बार लगाएँ — तैलीय त्वचा पर हफ़्ते में तीन से चार बार और रूखी त्वचा पर हफ़्ते में एक से दो बार — वह भी शहद या दूध जैसी नमी देने वाली चीज़ों के साथ मिलाकर।
ध्यान रखें: मुल्तानी मिट्टी को चेहरे पर सूखकर चटकने तक छोड़ देना आम ग़लती मानी जाती है। पंद्रह से बीस मिनट में, जब पैक हल्का नम हो, तभी उसे हटा देना बेहतर माना जाता है। रूखी त्वचा के लिए दस से बारह मिनट काफ़ी हैं।
कौन-सी त्वचा के लिए कौन-सा फेस पैक
मुल्तानी मिट्टी अकेले भी लगाई जा सकती है, लेकिन इसे किसके साथ मिलाया जाए यह त्वचा के प्रकार पर निर्भर करता है। नीचे चार पारंपरिक मिश्रण दिए गए हैं, जो घर की रसोई की चीज़ों से बन जाते हैं।

तैलीय त्वचा — मुल्तानी मिट्टी, नीम और नींबू: दो बड़े चम्मच मुल्तानी मिट्टी में नीम का पानी और नींबू के रस की कुछ बूँदें मिलाएँ। लगाकर पंद्रह मिनट रखें। यह मिश्रण तेल को सँभालने, त्वचा को साफ़ दिखाने और रंगत निखारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
रूखी त्वचा — मुल्तानी मिट्टी, शहद और कच्चा दूध: दो बड़े चम्मच मुल्तानी मिट्टी में एक बड़ा चम्मच शहद और उतना कच्चा दूध मिलाएँ जितने से पेस्ट बन जाए। शहद और दूध नमी देते हैं, जबकि मिट्टी सफ़ाई का काम करती है। इसे सिर्फ़ दस से बारह मिनट ही रखें।
निखार के लिए — मुल्तानी मिट्टी, गुलाब जल और हल्दी: दो बड़े चम्मच मुल्तानी मिट्टी में गुलाब जल और चुटकी भर हल्दी मिलाएँ। यह मिश्रण भारतीय घरों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है — मिट्टी सफ़ाई करती है, गुलाब जल त्वचा को ताज़ा करता है और हल्दी रंगत निखारने से जोड़ी जाती है।
टैन के लिए — मुल्तानी मिट्टी, टमाटर और दही: दो बड़े चम्मच मुल्तानी मिट्टी में टमाटर का गूदा और दही मिलाकर पंद्रह मिनट लगाएँ। टमाटर के प्राकृतिक एसिड और दही के लैक्टिक एसिड को टैन हल्का करने से जोड़ा जाता है, जबकि मिट्टी मृत कोशिकाओं को हटाती है।
मुल्तानी मिट्टी से नहाने और साबुन-उबटन के फायदे
हर दिन चूर्ण घोलकर पैक बनाना सबके लिए आसान नहीं होता। यही वजह है कि मुल्तानी मिट्टी अब साबुन और उबटन के रूप में भी मिलती है, जिन्हें नहाते समय सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है।
नहाते समय मुल्तानी मिट्टी वाला उबटन या साबुन लगाने पर वही सफ़ाई शरीर की त्वचा को भी मिलती है — अतिरिक्त तेल और मैल हटता है और त्वचा साफ़ महसूस होती है। खुले चूर्ण के मुक़ाबले इसमें न बिखरने की परेशानी रहती है और न हर बार मिश्रण तैयार करने में समय लगता है।
हमारा मुल्तानी मिट्टी उबटन फेस एंड बॉडी वॉश इसी सोच से बनाया गया है। इसमें मिट्टी, जड़ी-बूटियाँ और प्राकृतिक सामग्री पहले से मिली हुई हैं और बस पानी मिलाना होता है। यह चेहरे और शरीर, दोनों के लिए बनाया गया है, और रोज़ के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर इसमें नमी देने वाली सामग्री भी शामिल की गई है।
किन बातों का ध्यान रखें
मुल्तानी मिट्टी सौम्य ज़रूर मानी जाती है, फिर भी कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।
रूखी और संवेदनशील त्वचा — ऐसी त्वचा पर मुल्तानी मिट्टी अकेले न लगाएँ। शहद, दूध या गुलाब जल के साथ मिलाकर लगाएँ, और हफ़्ते में एक से दो बार से ज़्यादा नहीं। पैक हटाने के बाद नमी देने वाली चीज़ लगाना यहाँ और भी ज़रूरी हो जाता है।
बाहरी उपयोग — यह लेख केवल बाहरी उपयोग से जुड़ा है, यानी यहाँ बताए गए सभी तरीके त्वचा और बालों पर लगाने से जुड़े हुए हैं।
अगर आपकी त्वचा या बालों से जुड़ी कोई परेशानी लंबे समय से बनी हुई है, आप गर्भवती हैं, बच्चों पर इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं या कोई दवा चल रही है, तो पहले अपने डॉक्टर या वैद्य से सलाह लें। किसी भी नए मिश्रण को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले हाथ की त्वचा पर थोड़ा-सा लगाकर देख लेना बेहतर होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मुल्तानी मिट्टी लगाने से क्या होता है? +
चेहरे पर लगाने के बाद यह अतिरिक्त तेल और रोमछिद्रों में जमा मैल को सोख लेती है और सतह पर जमी मृत कोशिकाओं को हटाती है। इसी वजह से पैक हटाने के बाद त्वचा साफ़, ताज़ा और पहले से चमकदार दिख सकती है। नियमित उपयोग में रोमछिद्र कसे हुए दिखने लगते हैं और धूप से पड़ा टैन धीरे-धीरे कम नज़र आ सकता है।
मुल्तानी मिट्टी में क्या पाया जाता है (multani mitti mein kya paya jata hai)? +
मुल्तानी मिट्टी को अंग्रेज़ी में फुलर्स अर्थ कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से कैल्शियम बेंटोनाइट, मैग्नीशियम क्लोराइड, सिलिका, आयरन ऑक्साइड और एल्युमिना जैसे खनिज पाए जाते हैं। कैल्शियम बेंटोनाइट की वजह से ही इसे तेल और अशुद्धियाँ सोखने वाली मिट्टी माना जाता है।
मुल्तानी मिट्टी के फायदे पुरुषों के लिए क्या हैं (multani mitti ke fayde)? +
पुरुष भी इसे उसी तरह इस्तेमाल कर सकते हैं, अलग तरीका अपनाने की ज़रूरत नहीं होती। यह अतिरिक्त तेल सोखती है, रोमछिद्रों को साफ़ और कसा हुआ दिखाती है और दाढ़ी बनाने के बाद होने वाली जलन में आराम देने वाली मानी जाती है। तैलीय त्वचा वाले पुरुषों के लिए इसे ख़ास तौर पर उपयोगी माना जाता है।
मुल्तानी मिट्टी से नहाने से क्या होता है (multani mitti se nahane se kya hota hai)? +
नहाते समय मुल्तानी मिट्टी वाले साबुन या उबटन का इस्तेमाल करने पर शरीर की त्वचा से भी अतिरिक्त तेल और मैल हटता है और त्वचा साफ़ महसूस होती है। रोज़ के लिए तैयार उबटन या साबुन ज़्यादा आसान रहता है, क्योंकि हर बार चूर्ण घोलने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
क्या मुल्तानी मिट्टी रोज़ लगाई जा सकती है और कितनी देर लगाकर रखें? +
तैलीय त्वचा वाले लोग मुल्तानी मिट्टी वाला पतला फेस वॉश रोज़ इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन गाढ़ा फेस पैक हफ़्ते में तीन से चार बार ही सुझाया जाता है। रूखी या संवेदनशील त्वचा पर हफ़्ते में एक से दो बार काफ़ी माना जाता है। एक बार में पंद्रह से बीस मिनट, और रूखी त्वचा के लिए दस से बारह मिनट पर्याप्त माने जाते हैं।
क्या गर्भावस्था में मुल्तानी मिट्टी चेहरे पर लगा सकते हैं (pregnancy m multani mitti ke fayde)? +
मुल्तानी मिट्टी एक प्राकृतिक खनिज मिट्टी है और बाहरी उपयोग में इसे सौम्य माना जाता है, इसमें कोई रसायन नहीं मिलाया जाता। फिर भी गर्भावस्था में त्वचा पर कोई भी नई चीज़ शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से एक बार पूछ लेना बेहतर रहता है।
मुल्तानी मिट्टी का पानी पीने के फायदे क्या हैं (multani mitti ka pani peene se kya hota hai)? +
यह लेख पूरी तरह बाहरी उपयोग पर आधारित है, यानी त्वचा और बालों पर लगाने से जुड़ा हुआ। मुल्तानी मिट्टी खाने या उसका पानी पीने को लेकर यहाँ कोई जानकारी नहीं दी गई है। ऐसा कुछ करने से पहले किसी योग्य वैद्य या डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।