सारांश: आयुर्वेद में सर्दियों को वात का मौसम माना जाता है, जब ठंडी और रूखी हवा त्वचा की नमी कम कर सकती है। ऐसे में मुल्तानी मिट्टी को छोड़ना ज़रूरी नहीं है। इसमें शहद, दूध और बादाम का तेल जैसी चिकनाई और गर्माहट देने वाली चीज़ें मिलाकर सफ़ाई के साथ नमी भी बनाए रखी जा सकती है।
मुल्तानी मिट्टी उबटन फेस एंड बॉडी वॉश देखेंपढ़ने का समय: 10 मिनट
Read this article in English: Unlock Radiant Skin This Winter with Multani Mitti Benefits and Face & Body Ubtan

Multani Mitti Ubtan Face & Body Wash 150gm (Pack of 2) — ₹599.00
चेहरे और शरीर, दोनों के लिए मुल्तानी मिट्टी वाला उबटन वॉश।
प्रोडक्ट देखें →सर्दियों में मुल्तानी मिट्टी लगाने के फायदे
सर्दी आते ही कई लोगों की त्वचा कुछ ही दिनों में रूखी, पपड़ीदार और फीकी दिखने लगती है। बाहर की ठंडी हवा त्वचा की नमी कम कर सकती है और घर के हीटर इस रूखेपन को और बढ़ा सकते हैं। ऐसे में रोज़ की सामान्य देखभाल अक्सर काफ़ी नहीं लगती।
इसी वजह से बहुत से लोग सर्दियों में मुल्तानी मिट्टी लगाना बंद कर देते हैं, यह सोचकर कि इससे त्वचा और रूखी हो जाएगी। पर यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। सही चीज़ों के साथ मिलाकर लगाने पर इस मौसम में भी इसके कई फायदे मिल सकते हैं।

- मृत कोशिकाओं की परत हटाना — माना जाता है कि सर्दियों में त्वचा के नवीनीकरण की गति धीमी हो जाती है, इसलिए ऊपर मृत कोशिकाएँ ज़्यादा जमा होने लगती हैं। इस परत के रहते मॉइस्चराइज़र त्वचा में अच्छी तरह नहीं समा पाता।
- रोमछिद्रों की सफ़ाई — कमरों की गर्माहट और भारी मॉइस्चराइज़र रोमछिद्रों को बंद कर सकते हैं, जिससे सर्दियों में भी दाने निकल सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी रोमछिद्रों को साफ़ रखने में मदद कर सकती है।
- तेल का बेहतर अवशोषण — मृत कोशिकाओं की परत हटने पर कुमकुमादि तैलम और दूसरे तेल त्वचा में बेहतर ढंग से समा सकते हैं।
- चमक को सहारा — पैक लगाते समय होने वाली हल्की मालिश से त्वचा की ऊपरी सतह में ताज़गी महसूस हो सकती है। इससे सर्दियों में दिखने वाली थकी और फीकी रंगत कम लग सकती है।
मुल्तानी मिट्टी की तासीर और सर्दियों में वात का असर
अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि मुल्तानी मिट्टी ठंडी होती है या गर्म, और क्या इसे सर्दियों में लगाना चाहिए। इस मौसम में मिट्टी की अपनी तासीर से ज़्यादा अहम यह माना जाता है कि मौसम त्वचा पर कैसा असर डालता है।
आयुर्वेद में सर्दियों को वात का मौसम माना जाता है। वात के ठंडे और रूखे गुण त्वचा की नमी को भीतर से कम करने वाले माने जाते हैं।
आयुर्वेदिक दृष्टि: वात को संतुलित रखने के लिए आयुर्वेद आहार और त्वचा की देखभाल, दोनों में चिकनाई देने वाले (स्निग्ध) और गर्माहट देने वाले (उष्ण) गुणों वाली चीज़ें सुझाता है। इसी कारण सर्दियों में मुल्तानी मिट्टी के पैक में तेल और शहद मिलाने की सलाह दी जाती है।

सिर्फ़ पानी में घोली गई मुल्तानी मिट्टी सर्दियों में त्वचा को ज़्यादा रूखा कर सकती है। वहीं शहद, दूध और बादाम के तेल की कुछ बूँदों के साथ बना पैक सफ़ाई के साथ-साथ नमी बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।
त्वचा की देखभाल में दो आम गलतियाँ
ठंड के मौसम में त्वचा की देखभाल करते हुए लोग अक्सर दो में से कोई एक गलती कर बैठते हैं। दोनों ही स्थितियों में त्वचा रूखी या बेजान बनी रह सकती है।
भारी रासायनिक क्रीम पर निर्भर रहना — गाढ़ी क्रीम त्वचा पर कुछ समय के लिए एक परत बना देती हैं। लेकिन इनसे रूखेपन में लंबे समय तक राहत मिले, यह ज़रूरी नहीं है।
सफ़ाई पूरी तरह छोड़ देना — रूखेपन के डर से कई लोग फेस पैक और गहरी सफ़ाई बंद कर देते हैं। इससे रोमछिद्रों में मैल जमा हो सकता है और त्वचा पहले से ज़्यादा फीकी और बेजान दिख सकती है।
आयुर्वेद में इन दोनों के बीच का रास्ता सुझाया जाता है: गहरी सफ़ाई जारी रखें, पर उसका नुस्खा मौसम के अनुसार बदलें। नीचे दिए पैक इसी सोच पर आधारित हैं।
सर्दियों के लिए मुल्तानी मिट्टी फेस पैक के 4 नुस्खे
इन चारों पैक में मुल्तानी मिट्टी के साथ कोई न कोई नमी देने वाली चीज़ मिलाई गई है। अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार एक पैक चुनें और बताए गए समय से ज़्यादा देर तक न रखें।

1. नमी और चमक के लिए पैक — 2 बड़े चम्मच मुल्तानी मिट्टी में 1 बड़ा चम्मच शहद और इतना कच्चा दूध मिलाएँ कि चिकना पेस्ट बन जाए। इसे 12–15 मिनट रखें और हल्की नमी रहते ही धो लें। इसके बाद गुलाब जल का हल्का छिड़काव करें और कुमकुमादि तैलम लगाएँ। यह पैक हर तरह की त्वचा पर लगाया जा सकता है; तैलीय त्वचा पर हफ़्ते में दो बार और रूखी या मिश्रित त्वचा पर हफ़्ते में एक बार।
2. गहरे पोषण के लिए पैक — 2 बड़े चम्मच मुल्तानी मिट्टी में 1 छोटा चम्मच बादाम का तेल, एक चुटकी हल्दी और ज़रूरत भर गुलाब जल मिलाएँ। इसे 15 मिनट तक लगा रहने दें। बहुत रूखी और बढ़ती उम्र वाली त्वचा के लिए इसे हफ़्ते में एक बार लगाने की सलाह दी जाती है।
3. फीकी त्वचा के लिए पैक — 2 बड़े चम्मच मुल्तानी मिट्टी वाले उबटन में 1 बड़ा चम्मच दही और 1 छोटा चम्मच शहद मिलाएँ। 12–15 मिनट बाद धो लें। सर्दियों में थकी और फीकी दिखने वाली त्वचा के लिए इसे हफ़्ते में 1–2 बार लगाया जा सकता है।
4. तैलीय त्वचा के लिए पैक — 2 बड़े चम्मच मुल्तानी मिट्टी में नीम का पानी, टी ट्री तेल की कुछ बूँदें और 1 छोटा चम्मच शहद मिलाएँ। इसे 15 मिनट रखें। जिनकी त्वचा तैलीय है और सर्दियों में भी दाने निकलते हैं, उनके लिए यह हफ़्ते में दो बार सुझाया जाता है।
सर्दियों में पैक हटाने का सही समय: पैक को चेहरे पर पूरी तरह सूखकर चटकने न दें। जब वह सूखने लगे पर छूने पर अब भी हल्का नम लगे, तभी हटा दें। सूखकर चटकता पैक त्वचा को खींचता है, जिससे बहुत बारीक दरारें पड़ सकती हैं।
सर्दियों में शरीर पर उबटन कैसे लगाएँ
उबटन बेसन, हल्दी, चंदन, जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक तेलों से बना एक पारंपरिक आयुर्वेदिक लेप है। यह सिर्फ़ चेहरे के लिए नहीं है; परंपरा में इसे पूरे शरीर पर लगाया जाता है, और सर्दियों में यह ख़ास तौर पर उपयोगी माना जाता है।
- साबुन की जगह — माना जाता है कि उबटन त्वचा का प्राकृतिक तेल छीने बिना सफ़ाई करता है, जबकि कई साबुन रूखापन बढ़ा सकते हैं।
- सूखी परत हटाना — कोहनियों, घुटनों और टाँगों के अगले हिस्से पर जमी सूखी, पपड़ीदार त्वचा हल्की रगड़ से हट सकती है।
- ताज़गी — रगड़कर लगाने से त्वचा में हल्की गर्माहट और ताज़गी महसूस होती है।
लगाने का तरीका: नहाने से पहले ये आसान कदम अपनाएँ।
- फेस उबटन या मुल्तानी मिट्टी वाले उबटन को कच्चे दूध या दही में मिलाकर पेस्ट बनाएँ।
- इसे पूरे शरीर पर लगाएँ, ख़ासकर कोहनियों, घुटनों और एड़ियों जैसी रूखी जगहों पर।
- 5–10 मिनट तक लगा रहने दें।
- गुनगुने पानी से धोते हुए हल्के हाथ से रगड़कर हटाएँ।
- तौलिये से थपथपाकर सुखाएँ और तुरंत नारियल का तेल या तिल का तेल लगाएँ।
अगर आप घर पर उबटन तैयार नहीं करना चाहते, तो हमारा मुल्तानी मिट्टी उबटन फेस एंड बॉडी वॉश भी एक विकल्प है। इसे ऊपर बताए तरीके से दूध या दही में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है।
सर्दियों की दिनचर्या: त्वचा के लिए और क्या करें
पैक और उबटन के साथ रोज़ की कुछ आदतें भी सर्दियों में त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।
- नहाने से पहले तेल की मालिश (अभ्यंग) — माना जाता है कि गुनगुने तेल की यह मालिश त्वचा पर नमी की एक परत बनाती है। वात प्रकृति के लिए तिल का तेल और पित्त प्रकृति के लिए नारियल का तेल सुझाया जाता है।
- चेहरे पर तेल दो बार — सर्दियों में कुमकुमादि तैलम सुबह और रात, दोनों समय लगाया जा सकता है।
- गुनगुने पानी से स्नान — बहुत गर्म पानी से नहाना भले अच्छा लगे, पर यह त्वचा की नमी की परत को नुकसान पहुँचा सकता है।
- भीतर से नमी — दिन भर गुनगुना पानी पिएँ और रात में हल्दी वाला दूध लें।
- होंठों की देखभाल — सोने से पहले होंठों पर घी या नारियल का तेल लगाएँ। पेट्रोलियम वाले बाम की जगह यह एक पारंपरिक विकल्प है।
- च्यवनप्राश — परंपरा में सर्दियों में रोज़ च्यवनप्राश लेने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि भीतर का अच्छा स्वास्थ्य त्वचा पर भी दिखाई देता है।
इस तरह मुल्तानी मिट्टी और उबटन को नमी देने वाली चीज़ों, गुलाब जल और कुमकुमादि तैलम के साथ जोड़कर पूरी सर्दी इस्तेमाल किया जा सकता है।
ध्यान दें: अगर त्वचा से जुड़ी कोई परेशानी लंबे समय से बनी हुई है, आप गर्भवती हैं, बच्चों के लिए कोई नुस्खा अपनाना चाहते हैं या कोई दवा ले रहे हैं, तो इन सुझावों को अपनाने से पहले डॉक्टर या वैद्य से सलाह लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सर्दियों में मुल्तानी मिट्टी लगाने के फायदे क्या हैं, और क्या इससे त्वचा रूखी होगी? +
सर्दियों में भी मुल्तानी मिट्टी मृत कोशिकाओं की परत हटाने, रोमछिद्रों को साफ़ रखने और बाद में लगाए जाने वाले तेल को त्वचा में बेहतर ढंग से समाने में मदद कर सकती है। रूखेपन से बचने के लिए इसे सादे पानी की जगह शहद, कच्चे दूध, दही, बादाम के तेल या गुलाब जल के साथ मिलाएँ। इस मौसम में इसे हफ़्ते में 1–2 बार तक सीमित रखना बेहतर माना जाता है।
multani mitti thandi hoti hai ya garam, और सर्दियों में इसकी तासीर का क्या ध्यान रखें? +
सर्दियों में मिट्टी की अपनी तासीर से ज़्यादा अहम यह माना जाता है कि मौसम त्वचा पर कैसा असर डालता है। आयुर्वेद में सर्दियों को वात का मौसम माना जाता है, जिसके ठंडे और रूखे गुण त्वचा की नमी कम कर सकते हैं। इस मौसम में सिर्फ़ पानी में घोली गई मुल्तानी मिट्टी त्वचा को ज़्यादा रूखा कर सकती है। इसलिए इसमें शहद, दूध या बादाम का तेल जैसी चिकनाई और गर्माहट देने वाली (आयुर्वेद में स्निग्ध और उष्ण) चीज़ें मिलाने की सलाह दी जाती है।
ubtan or multani mitti: दोनों में क्या फ़र्क़ है? +
उबटन बेसन, हल्दी, चंदन, जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक तेलों से बना पारंपरिक लेप है, जिसे एक साथ सफ़ाई, सूखी परत हटाने और नमी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मुल्तानी मिट्टी गहरी सफ़ाई और मृत कोशिकाएँ हटाने के लिए जानी जाती है, पर सर्दियों में इसे नमी देने वाली चीज़ों के साथ मिलाना ज़रूरी माना जाता है। इस मौसम में दोनों को अपनी दिनचर्या में साथ-साथ रखा जा सकता है।
सर्दियों में multani mitti face pack कितनी बार लगाना चाहिए? +
तैलीय त्वचा के लिए सर्दियों में हफ़्ते में दो बार काफ़ी माना जाता है। रूखी और मिश्रित त्वचा के लिए हफ़्ते में एक बार सुझाया जाता है। हर बार शहद, दूध या दही जैसी नमी देने वाली चीज़ मिलाएँ और पैक को सूखकर चटकने से पहले, हल्की नमी रहते ही हटा दें।
मुल्तानी मिट्टी का पैक हटाने के बाद क्या लगाएँ? +
पैक धोने के तुरंत बाद टोनर के रूप में गुलाब जल लगाएँ। फिर नमी बनाए रखने के लिए कुमकुमादि तैलम या नारियल का तेल लगाएँ। सफ़ाई, गुलाब जल और तेल का यह क्रम सर्दियों में पैक के बाद महसूस होने वाले रूखेपन को कम करने में मदद कर सकता है।
क्या पुरुष सर्दियों में उबटन लगा सकते हैं? +
हाँ, उबटन पुरुषों के लिए भी उतना ही उपयोगी माना जाता है। सर्दियों में शेव के बाद त्वचा अक्सर रूखी और संवेदनशील महसूस होती है; ऐसे में उबटन को शहद और दूध के साथ मिलाकर लगाया जा सकता है। इससे त्वचा को आराम और नमी मिल सकती है।