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अष्टांग हृदय सूत्रस्थान अध्याय 28 में वाग्भट बताते हैं कि धँसे हुए शल्य को कैसे पहचाना जाता था, कैसे निकाला...
आयुर्वेद के इस प्राचीन ग्रंथ का सरल हिंदी परिचय — यह क्या है, कब लिखी गई, इसमें क्या दर्ज है...
सुश्रुत संहिता के छह स्थानों, कुल 186 अध्यायों और निदान स्थान के 16 अध्यायों का आसान हिंदी में सार।
भावप्रकाश का पूर्व खंड शरीर की नौ रचनाओं को नाम और गिनती देता है, और स्रोतस् पर पहुँचकर गिनना बंद...
आचार्य वाग्भट का अष्टांग हृदय आयुर्वेद की आठों शाखाओं को 120 अध्यायों और 7,120 श्लोकों में समेटने वाला वह ग्रंथ...